9 जनवरी 2010

यह खेती भी खूब रही


फेसबुक का मैं सदस्य हूँ लेकिन उसपर मेरी सक्रियता बहुत कम है। फिर भी छठे-छमाहे देख लेता हूँ। फेसबुक पर एक खेल फार्मविले अति-लोकप्रिय है। यह खेल क्या है इसे जानने में मेरी कोई रूचि नहीं थी। न आज होती गर मेरे संग यह हादसा न हुआ होता। आज के आज इक्कीसवीं सदी की एक नवयुवती ने बताया कि आज-कल वो अपना टाइम पास फार्मविले खेल कर करती है। उसने कहा ,यह बहुत ही मजेदार खेल है। मैंने पूछा इसमें करना क्या होता है ? तो वह खेती-बाड़ी और पशुपालन में प्रयुक्त होने वाली शब्दावली का धड़ल्ले से प्रयोग करने लगी। कान्वेन्ट में पढ़ी लिखी, एक नामी-गिरामी मास-काम संस्थान की डिग्रीधारी नवयुवती को खेत-खलिहान, पशु-किसान की ऐसी जानकारी उपलब्ध कराने वाले फार्मविले महाराज को मैंने मन ही मन सादर प्रणाम किया। फार्मविले महाराज ने उस नवयुवती में आनलाइन किसानी के प्रति ऐसा आकर्षण भर दिया है कि वो इसके अलावा कोई बात ही नहीं करना चाहती ! और मुझे जैसे लोगों, जिन्हें इस किसानी का कखगघ नहीं पता, उनके अज्ञान और अभागेपन पर तरस खाती है !!

उसके सामने मैं  बुरी तरह झेप गया था। क्योंकि खेत तो मेरे पास भी हैं (जमीन पर न कि फेसबुक पर) लेकिन मुझे उसके जितनी खेती-बाड़ी की जानकारी नहीं है। खैर, फेसबुक के आने से पहले भी भारत एक कृषि प्रधान देश ही था।

7 टिप्‍पणियां:

  1. और हम खेती-किसानी पर फ़ालतू में कितने पन्ने रंग गये।

    विदर्भ में बस यही खेल सिखा देते नेता लोग तो सब किसान लोग फ़ायदे में आ जाते!!!

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  2. खेती की है, खेती करना आता भी है। इसे खेलते कैसे हैं, मैदान कौनसा है? हमें भी सिखायें !

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  3. प्रीतीश जी
    इसे खेलना तो मुझे भी नहीं आता। यह तो फेसबुक के महारथी ही बता सकेंगे या फिर भारत के कृषि मंत्री !

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  4. Chalo ab FARMVILLE ke jariye kam se kam kheti baadi ka aanand to le sakenge.. gaav se vida hue kai saal ho gaye hai..

    http://som-ras.blogspot.com

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  5. सूचनाओं के जंगल में किस चीज़ पर जानकारी उपलब्ध नहीं है ,बस खोजने वाला चाहिये लेकिन कृषि मे स्नातक अच्छा किसान हो यह ज़रूरी तो नहीं वह तो बेचारा कृशि विभाग में बाबू बन जाता है ।

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