आज नामवर सिंह जन्मदिन है। उन्हीं की लिखी इस कविता के साथ उन्हें बना रहे बनारस की तरफ से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज तुम्हारा जन्मदिवस, यूँ ही यह संध्या
भी चली गई, किंतु अभागा मैं न जा सका
समुख तुम्हारे और नदी तट भटका-भटका
कभी देखता हाथ कभी लेखनी अबन्ध्या।
पार हाट, शायद मेल; रंग-रंग गुब्बारे।
उठते लघु-लघु हाथ,सीटियाँ; शिशु सजे-धजे
मचल रहे... सोचूँ कि अचानक दूर छ: बजे।
पथ, इमली में भरा व्योम,आ बैठे तारे
'सेवा उपवन',पुस्पमित्र गंधवह आ लगा
मस्तक कंकड़ भरा किसी ने ज्यों हिला दिया।
हर सुंदर को देख सोचता क्यों मिला हिया
यदि उससे वंचित रह जाता तू.........?
क्षमा मत करो वत्स, आ गया दिन ही ऐसा
आँख खोलती कलियाँ भी कहती हैं पैसा।

्जन्मदिन की शुभकामनायें नामवर सिंह जी को।
प्रत्युत्तर देंहटाएंनामवर जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें।
प्रत्युत्तर देंहटाएंआदरणीय नामवर जी को जन्मदिन की बधाई और तुम्हें लौट आने की प्रिय रंग .....
प्रत्युत्तर देंहटाएंआदरणीय नामवर जी को जन्मदिन की बधाई !
प्रत्युत्तर देंहटाएंनामवर सिंह जी को जन्मदिवस की शुभकामनायें!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंनामवर सिंह जी को जन्मदिवस की शुभकामनायें..
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपको सक्रीय देखकर ख़ुशी हुई ..
नामवर सिंह जी को जन्मदिन की शुभकामनायें
प्रत्युत्तर देंहटाएंनामवर जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें
प्रत्युत्तर देंहटाएंनामवर जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें
प्रत्युत्तर देंहटाएंशुभकामनायें.
प्रत्युत्तर देंहटाएंnamwar ji ko janmdin par bahut bahut subhkamnayen, Yun hi bane rahen
प्रत्युत्तर देंहटाएंआलोचना के शिखर पुरुष नामवार जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई -शुभकामना ....यूँ ही उनकी छांव बनी रहे ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंजन्मदिन की हार्दिक शुभकामना,,,
प्रत्युत्तर देंहटाएंहार्दिक शुभकामनायें।
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