10 जुलाई 2010

देशहित में यही है कि मणि जी की 'बात' सच निकले।

टाइम्स आफ इण्डिया इन दिनों इतना फुटबाल खेल रहा है कि पूछिए मत। इस कदर फुटबाल खेलने का नतीजा ये निकला कि आज उसके मुख्य पृष्ठ पर पाल जी(जर्मन आक्टोपस) और मणि जी(भारतीय मूल(!) के मलेशियाई तोते) की फोटो छप गई। क्योंकि ये दोनों प्राणी टाइम्स वालों की ही तरह फुटबाल प्रेमी हैं। सिर्फ प्रेमी होते तो शायद टाइम्स से कम ही होते ! लेकिन ये दोनों टाइम्स के खेल विशेषज्ञों से बड़े खेल विशेषज्ञ निकले। जिसकी वजह से टाइम्स को इनको ससम्मान-सचित्र जगह देनी पड़ी।

हाल ये है कि जहाँ सारे खेल विशेषज्ञ चूक गए वहाँ पाल जी और मणि जी बाजी मार ले गए ! जाहिर है कि फुटबाल विश्व कप के बाद भी यह मामला जारी रहेगा। इंसान की सोचने की क्षमता से आक्टोपस और तोते कैसे बीस पड़ गए इस पर शोध होंगे। होने ही चाहिए। होंगे ही। खैर ये तो भविष्य की बात है। भविष्य देखने के लिए तो पाल जी और मणि जी हैं ही। हम मनुष्य ताजा हालात की समीक्षा करें। यही मनुष्योचित है !

फाइनल से पहले तक पाल जी और मणि जी हर मैच के परिणाम पर सहमत थे। फाइनल मैच में दोनों का एकमत होना संभव नहीं था। डेमोक्रेसी है भाई, अपोजीशन का होना जरूरी है ! सो,फाइनल को लेकर पाल जी और मणि जी दोनों ने अलग-अलग टीमों पर हाथ धरा है।

मैं राष्ट्रवादी हूँ अतः हर मामले में देशहित की पहले सोचता हूँ। इसलिए मैंने सोचा (!) भारत के लिए बेहतर यह होगा कि पाल जी की बात गलत निकले। मणि जी का सही होना हर लिहाज से देशहित में है। हमारा देश ‘तोतों’ का देश है। गली-गली में ऐसे ‘तोते’मिल जाएंगे जो टाइम्स या किसी भी अन्य मीडिया हाउस के विषय-विशेषज्ञों से ज्यादा सटीक भविष्यवाणी कर सकते हैं !

गर मणि जी की बात सही हो गई तो भारत के पास अपने देश के ‘तोतों’ की ब्रांडिंग करने का सुनहरा मौका होगा। जरा सोचिए,वो दिन कैसा होगा....हर देश का सिरमौर ‘भारतीय तोता’ !!

अमेरिका का राष्ट्रपति कौन बनेगा,ये बताएगा ‘भारतीय तोता’। इरान पर हमला कब होगा ये बताएगा ‘भारतीय तोता’। अमेरिका दुनिया में 'डेमो-क्रेसी' फैलाना कब बंद करेगा ये बताएगा ‘भारतीय तोता’। अंतरराष्ट्रीय मामलों का सबसे बड़ा विशेषज्ञ, कोई और नहीं... ’भारतीय तोता’ !!

ऐसा नहीं है कि ‘भारतीय तोता’ विदेशी मामलों का ही जानकार होगा। भारत के बिल्कुल घरेलू मुद्दे,मँहगाई,बेरोजगारी,भूखमरी जैसे मुद्दे भी उसके विचारार्थ रहेंगे। लेकिन ये मुद्दे तो भारत में हमेशा से रहे हैं ! सो,मेरा ख्याल है भारतीय जनता की तरह ‘तोता समुदाय’ भी इन्हें ज्यादा गंभीरता से नहीं लेगा। जब-जब जरूरत पड़ेगी किसी ‘तोते’ को वोट देकर छुट्टी पा लेगा। लगता है,मैं विषय से भटक गया। बात फुटबाल की हो रही थी। न कि डेमोक्रेसी की। जो कहने के लिए मैंने यह पोस्ट लिखी सीधे उस पर आता हूँ।

मैं सभी आस्तिक लोगों से गुजारिश करूँगा कि विशुद्ध भारतीय मूल के मलेशियाई तोते मणी जी की लिए प्रार्थना करें। कि उनकी ही भविष्यवाणी सच निकले। जिससे ‘भारतीय ‘और ‘भारतीय मूल’ के ‘तोतों’ के दिन बहुरें।

3 टिप्‍पणियां:

  1. हमें तो उन तमाम विदेशी एजेंसियों की पैकेजिंग पर हैरानी हो रही थी जिन पर लंबे समय से भरोसा करता आ रहा हूं। रिपोर्ट पढ़ते हुए लग रहा था कि सबके भीतर इंडिया टीवी की आत्मा घुस आयी है। इस ऑक्टोपस की भविष्यवाणी वाले प्रकरण से एक बात जो साफ हो गयी कि जो चिरकुटई इंडिया टीवी किया करता है उसकी जड़े ग्लोबल मीडिया में पहले से मौजूद है। ये भी न्यूज इन्डस्ट्री की एक पैटर्न है। इस प्रकरण में नेशनल और रीजनल मीडिया के विश्लेषण से कहीं ज्यादा ग्लोबल मीडिया के विश्लेषण की जरुरत है।.

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  2. और आम जनहित में यही है की पॉल जी ही विजयश्री का वरण करे I देश के ग्रामों में अल्हड बालकों के कन्धों पर बैठते आम मणि जी हाई-प्रोफाइल हो गए तो, नेताओ की भांति इनके भी दर्शन दुर्लभ हो जायेंगे

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  3. ये खबर दैनिक हिंदुस्तान के भी पेज वन पर चमक रही है
    फोटू समेत. जग तोते तोते हो गया...
    विनीत की बात के बाद अब कहने को क्या रह गया.

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