12 जुलाई 2010

आवेश की दो कविताएँ

1.
प्यार
केवल भ्रम
याद
केवल श्रम
जिसके पूर्व
जिसके पश्चात
कोई बदलाव नहीं
और यह सम्बंध
पिछली जिंदगी का
पूर्ववत घिसता हुआ
क्रम -
जो मुझे मंजूर नहीं

2.
कोई क्या देगा गम उनको
जो खुद गैरों का गम लेंगे

जहाँ सब भागते होंगे
वहीँ कुछ लोग थम लेंगे

जहाँ सब हाँथ सेकेंगे
वहीँ कुछ जल रहे होंगे

कोई क्या उनको कम देगा
जो अपने आप कम लेंगे

- आवेश तिवारी

8 टिप्‍पणियां:

  1. बेनामीजुलाई 12, 2010

    Manas Khatri:
    बहुत ही बढियां आवेश जी..आप की बात में दिल की गहराई छुपी हुई है..शब्दों की ढलाई आप ने काफी अच्छे ढंग से की है..
    www.manaskhatri.wordpress.com

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  2. प्यार में दुख और हताशा के बावज़ूद मैं इस विचार से सहमत नहीं. हां, आपकी भावाभिव्यक्ति हमेशा की तरह लाज़वाब है.

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  3. पहली में भावों का भण्डार है
    दूसरी में शब्दों का चमत्कार है
    दोनों कवितायेँ अच्छी हैं
    इसलिए आपको मेरा नमस्कार है

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  4. पसंद आई आवेश जी की रचनायें..आभार.

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  5. कवितायें निसंदेह आज भी यह सबूत हैं कि अमानवीय होते जा रहे समय में भी सच्ची संवेदनाएं जीवित हैं और निश्चित रहेंगीं.लेकिन ऐसी पंक्तियाँ भी एक संवेदनशील कलम से ही निकल कर बाहर आ सकती हैं.आवेश को बधाई.

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  6. आवेश जी,
    आपकी पहली रचना में जीवन संघर्ष और साथ हीं मान्य नियमों के प्रति विद्रोह है, वहीं दूसरी कविता में आपकी आतंरिक संवेदनशीलता का विस्तार है| उत्कृष्ट रचना, बहुत शुभकामनाएं!

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  7. आवेश जी की कविताओं में आवेश है , शिल्प में सुधार अपेक्षित है . आगे अच्छी कविताओं के लिए शुभकामनाएं !

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  8. बेनामीजुलाई 15, 2010

    1 प्रेम सधना
    प्रेम श्रधा
    प्रेम पूजा
    प्रेम अनुराग है
    वो क्या जाने प्रेम
    जिनमे प्रेम का मधुर नहीं
    छलियों को बस
    प्रेम केवल भ्रम का दर्पण ही नजर आता है


    2.आवेश को बस शब्दों से ही खेलना आता है
    गम लेने की लिये जीना और मरना पड़ता है
    जो गम देते है उन्हें क्या गम क्या भ्रम होगा
    यह तो बस

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