7 जनवरी 2011

चट्टान

चट्टान को तोड़ो
वह सुन्दर हो जायेगी
उसे तोड़ो
वह और, और सुन्दर होती जायेगी

अब उसे उठालो
रख लो कन्धे पर
ले जाओ शहर या कस्बे में
डाल दो किसी चौराहे पर
तेज़ धूप में तपने दो उसे

जब बच्चे हो जायेंगे
उसमें अपने चेहरे तलाश करेंगे
अब उसे फिर से उठाओ
अबकी ले जाओ उसे किसी नदी या समुद्र के किनारे
छोड़ दो पानी में
उस पर लिख दो वह नाम
जो तुम्हारे अन्दर गूँज रहा है
वह नाव बन जायेगी

अब उसे फिर से तोड़ो
फिर से उसी जगह खड़ा करो चट्टान को
उसे फिर से उठाओ
डाल दो किसी नींव में
किसी टूटी हुई पुलिया के नीचे
टिको दो उसे
उसे रख दो किसी थके हुए आदमी के सिरहाने

अब लौट आओ
तुमने अपना काम पूरा कर लिया है
अगर कन्धे दुख रहे हों
कोई बात नहीं
यक़ीन करो कन्धों पर
कन्धों के दुखने पर यक़ीन करो

यकीन करो
और खोज लाओ
कोई नई चट्टान !

- केदारनाथ सिंह

3 टिप्‍पणियां:

  1. ...
    अगर कन्धे दुख रहे हों
    कोई बात नहीं
    यक़ीन करो कन्धों पर
    कन्धों के दुखने पर यक़ीन करो
    ...
    ..ये पंक्तियाँ सबसे अच्छी लगीं। अच्छी कविता पढ़ाने के लिए आभार।

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  2. भावों में विश्वास बना रहे ! अच्छी रचना के लिये बधाई !

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