आज (२८ जुलाई) सुविख्यात आलोचक नामवर सिंह का जन्मदिन है. जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ,पाठकों के लिए हम उनका यह साक्षात्कार प्रस्तुत कर रहे हैं,जिसे शैलेय ने लिया है और हमने उनके ब्लॉग से. शैलेय के ब्लॉग तक जाने के लिए यहाँ क्लिक करें. शैलेन्द्र पांडे की ली हुई तस्वीर गूगल से.
प्र. मार्क्स के बाद का विश्व काफी बदल चुका है पर मार्क्सवाद के सिद्धांतो में फेर-बदल नहीं हुए हैं। कम्यूनिस्ट पार्टियों की असफलता के पीछे यही कारण तो नहीं ?
प्र. मार्क्स के बाद का विश्व काफी बदल चुका है पर मार्क्सवाद के सिद्धांतो में फेर-बदल नहीं हुए हैं। कम्यूनिस्ट पार्टियों की असफलता के पीछे यही कारण तो नहीं ?
उ. एक दौर था जब संसार के अधिकतर भाग में कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार थी। भारत में भी सबसे सशक्त विपक्षी पार्टी कम्यूनिस्ट पार्टी ही थी। पर धीरे-धीरे रूस,चीन में खात्मा हुआ और दूसरी जगहों पर भी। एक समय भारत में कई राज्यों में कम्यूनिस्ट पार्टी काफी मजबूत अवस्था में थी। बाद में विकास की अवधारणा बदली। राजनीति का स्वरूप् बदला और आरक्षण जैसी चीजें आ गईं। दूसरी पार्टियां कम्यूनिस्ट पार्टी के एजेण्डे को लेकर सामने आ रही हैं। अब कम्यूनिस्ट आन्दोलन के लिए गुंजाइश कम है।
प्र. अब पूंजीवाद अपने नए रूप में सामने आ गया है। इससे कैसे निकला जाएगा ?
उ. नए अर्थतन्त्र के कारण परिवर्तन तो आया है। एक शेर इस मसले पर सटीक है-
शेख ने मस्जिद बना,मिस्मार को बुतखाना किया
तब तो एक सूरत भी थी,अब साफ वीराना किया
यही हाल है अब और पूंजीवाद का नया स्वरूप कुछ ऐसा है। मार्क्स ने कहा था पूंजीवाद के अन्दर ही इसका इलाज है। यूं विकास के लिए पूंजीवाद जरूरी है लेकिन पूंजीवाद कैपिटलाइज करती है। चीजों को निर्जीव बना देती है। ताजा उदाहरण आईपीएल प्रकरण है। पूंजीवाद के छूते ही बल्ले से सोना उछलने लगा और परिणाम सामने है। इसलिए सावधानी अपेक्षित है।
प्र. ज्ञानरंजन के प्रलेस छोड़ने को आप किस रूप में देखते हैं ?
उ. ज्ञानरंजन पहल के लिए समर्पित रहे हैं। उनका कोई साहित्यिक संगठन नहीं भी था और अब तो पहल बंद भी हो गई है। जाने कब से उन्होंने प्रलेस की मीटिंग,संगोष्ठी में जाना बन्द कर दिया था। इसलिए उनका प्रलेस से जाना कोई बड़ी क्षति नहीं रहा।
प्र. प्रलेस की प्रगति सन्तुष्ट करने योग्य है ?
उ. वर्तमान में तीन संगठन कार्य कर रहे हैं- प्रलेस,जलेस और जसम। इनमें सबसे अधिक सक्रिय प्रलेस ही है। इसकी पार्टी से भी बड़ा इसका कद है और मंच भी बड़ा है। इसकी पत्रिका वसुधा काफी अच्छी निकल रही है। आधार बड़ा हो तो अधिरचना बड़ी होती ही है। जलेस का पार्टी की अपेक्षा सांस्कृतिक मंच बड़ा है और नए लेखक इससे जुड़े भी हैं। लेकिन इसकी सक्रियता प्रलेस से काफी कम है। और जसम तो काफी पीछे है।
प्र. क्या परसाई जी के बाद व्यंग्य विधा का उत्तरोत्तर विकास हुआ है या वो वहीं ठहरी हुई है ?
उ. परसाई व्यक्ति न होकर संस्था थे। कोई भी विषय उनकी पैनी नजर से छूटा नहीं,खास कर राजनीति में उनका पैनापन देखने योग्य है। और यह सब उन्होंने जबलपुर में रहते हए किया। वे लेखक के प्रति जितने समर्पित थे और जितना लिखा उतना तो किसी ने लिखा भी नहीं है। हिन्दी में दूसरा परसाई होने की संभावना नहीं है।
प्र. समालोचना में नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं लेकिन पाठ्यक्रम से समालोचना गायब हो रही है ?
उ. पाठ्यक्रम से समालोचना गायब करके कुद हासिल नहीं होगा क्योंकि परीक्षा से गायब करना किसी के वश में नहीं है। हां,यह एक बड़ी अच्छी बात है कि युवा समालोचक काफी अच्छा लिख रहे हैं। और समालोचना के अच्छे भविष्य की ओर इशारा कर रहे हैं।
प्र. पत्रकारिता की आज की स्थिति पर क्या कहना चाहेंगे ?
उ. इंटरनेट क्रान्ति ने पत्रकारिता का नक्शा और ढांचा बदल दिया है। छापे वाली पत्रकारिता दूसरी तरह की चीज हो गई है। पत्रकारिता का सच यह है कि अब पेड न्यूज छप रही है। पत्राकर नाम की संस्था खत्म हो गई। पूंजीवाद हावी हो गया है। भाषायी पत्रकारिता का हाल बुरा है। सम्भवतः मलयालम पत्रकारिता ठीक है। बल्कि में कहूंगा कि हिन्दी पत्रकारिता ने मुझे बहुत निराश किया है।
प्र. पत्रकारिता की भाषा को लेकर कई सवाल उठते रहते हैं। पत्रकारिता कहती है वो आम आदमी की भाषा से जुड़ रही है आप इस विषय पर क्या कहना चाहेंगे ?
उ. कौन कहता है कि यह आम आदमी की भाषा है। आज तो हिंग्लिश लिखा जा रहा है। आज के पत्रकार भूल गए हैं कि मुंह से पहले कान खुले रखने चाहिए। भाषा की ताकत से अनजान कुछ भी लिखते-कहते रहते हैं। कमाल खान और विनोद दुआ जैसे पत्रकार भी हैं। उनकी लोकप्रियता बताती है कि आम आदमी अच्छा पसंद करता है।
प्र. नक्सलवाद से देश भर के लेखक जुड़े रहे हैं। हिन्दी साहित्य में इस पर रचनाएं क्यों नहीं आ रही हैं ?
उ. क्रान्तिकारी विचार कई शक्ल में आते हैं। ऐसी रचना तब बाहर आती है जब गुस्सा दर्द में बदलता है। हालांकि कुछ काम हुआ है पर अभी और बाकी है। क्रोध और करुणा दोनों एक साथ होगी तो इससे सम्बन्धित चीजें बाहर आएंगी।

aapko janmdin ki dheron badhaayiyan ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंजन्मदिन की ढेरों बधाईयाँ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंजन्म दिन की ढेरों बधाई..
प्रत्युत्तर देंहटाएंसादर
http://mohallalive.com/2011/07/29/namwar-singh-has-completed-85-years/
प्रत्युत्तर देंहटाएंshukriya lekh sanjha karne ke liye.. naamvarji ko padhna achha lagta hai.
प्रत्युत्तर देंहटाएंइन्कार का गिला ना किया जब हमनें,
प्रत्युत्तर देंहटाएंमेरी आह पर इलज़ाम लगाए क्यूँ?