लीना मेहेन्दले की यह टीप दो दिन पहले आई थी. यह छोटी सी टीप हमारे समाज के एक स्याह पक्ष को उजागर करती है. एक सवाल उठाती है कि क्या आज के कुछ नेताओं में पेशेवर हत्यारों जितनी नैतिकता भी नहीं बची है ! - संचालक
"मैंने मनीष तिवारी का वह मदांध वक्तव्य सुना जिसमें कुछ दिनों पहले उसने अण्णा पर कीचड उछालते हुए सवाल पूछा था कि "अरे, तुम किस मुँहसे भ्रष्टाचार मिटानेकी बात करते हो, तुम तो खुद सरसे पाँव तक भ्रष्टाचारमें डूबे हो ।" एक तरफ यह अविवेकी वक्तव्य है। दूसरी तरफ मुझे दिखता है उस हार्डण्ड क्रिमिनल और मर्डरर का पुलिसमें दिया गया बयान जिसमें उसने कबूला कि उसने मंत्रीवर पदमसिंह पाटीलसे सुपारी लेकर एक आदमीका खून किया था, पर दूसरी सुपारी लेनेसे इसलिये इनकार किया कि वह सुपारी अण्णा हजारे के लिये थी और इस मर्डररकी आत्मा ने कहा – नही, ऐसे संत मनुष्यकी सुपारी मैं नही ले सकता।"
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