5 मार्च 2012

कोसल में विचारों की कमी है

महाराज बधाई हो !महाराज की जय हो |
युद्ध नहीं हुआ-
लौट गए शत्रु |

वैसे भी हमारी तैयारी पूरी थी !
चार अछौहिणी थी सेनाएँ,
दस सहस्त्र अश्व,
लगभग इतने ही हाथी|

कोई कसर न थी !
युद्ध होता भी तो
नतीजा यही होता |

न उनके पास अस्त्र थे
न अश्व,
न हाथी,
युद्ध हो भी कैसे सकता था ?
निहत्थे थे वे |

उनमे से हरेक अकेला था
और हरेक यह कहता था
प्रत्येक अकेला होता है !

जो भी हो,
जय यह आपकी है !
बधाई हो !
राजसूय पूरा हुआ,
आप चक्रवर्ती हुए-

वे सिर्फ़ कुछ प्रश्न छोड़ गए हैं
जैसे कि यह-
कोसल अधिक दिन टिक नहीं सकता,
कोसल में विचारों की कमी है!

-श्रीकान्त वर्मा

6 प्रतिक्रिया:

  1. विचारों का राजसूय, विचारों का राजशून्य..

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  2. वे सिर्फ़ कुछ प्रश्न छोड़ गए हैं
    जैसे कि यह-
    कोसल अधिक दिन नहीं टीक सकता,
    कोसल में विचारों की कमी है!

    sateek!

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  3. Srikant Varma - kar kavita sochne pe majoor karti hai.
    Is kavita ka bhi jawaab nahi

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  4. कोसल अधिक दिन नहीं टीक सकता,

    Teek nahi tik hona chahye na.
    Ya nahi?

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    1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. आप सही हैं मैंने एडिट कर दिया है शुक्रिया

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